भोपालपटनम: गणतंत्र दिवस पर ‘आनंद मेले’ की धूम, महिलाओं के हाथों के स्वाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता दिल

भोपालपटनम। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर स्थानीय हाई स्कूल मैदान में उल्लास और भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महिलाओं द्वारा भव्य ‘आनंद मेले’ का आयोजन किया गया, जिसने उत्सव की रौनक में चार चांद लगा दिए। मेले में न केवल लजीज व्यंजनों का स्वाद चखने को मिला, बल्कि सामुदायिक एकजुटता की मिसाल भी पेश की गई।
स्वाद का संगम: पारंपरिक व्यंजनों की सजी स्टॉल
आनंद मेले में भोपालपटनम की महिलाओं ने अपनी पाक कला का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न व्यंजनों के स्टॉल लगाए। मेले में आए आगंतुकों ने निम्नलिखित व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया:
मीठे पकवान: गरमा-गरम खीर और गाजर का हलवा।
नमकीन और चटपटे व्यंजन: पारंपरिक बड़ा, मिर्ची भजिया, लौकी बड़ा और आलू गुंडा।
मेले में बच्चों और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने बड़े उत्साह के साथ इन व्यंजनों का आनंद लिया।
5 वर्षों से जारी है परंपरा
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षक शेख मकबूल ने मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आनंद मेले की यह गौरवशाली परंपरा पिछले 5 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। उन्होंने कहा, “हर साल 26 जनवरी को महिलाएं बड़े उत्साह के साथ इस आयोजन का हिस्सा बनती हैं। मैं उन सभी महिलाओं को दिल से धन्यवाद देता हूँ जो अपना बहुमूल्य समय निकालकर इस कार्यक्रम को सफल बनाती हैं।”
सांस्कृतिक वैभव और सामुदायिक सहयोग
गणतंत्र दिवस का यह पर्व केवल व्यंजनों तक सीमित नहीं रहा। भोपालपटनम और आसपास के स्कूलों के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए, जिसकी दर्शकों ने खूब सराहना की।
इस आयोजन की सफलता में समाज के हर वर्ग का योगदान रहा:
महिला शक्ति: आयोजन की मुख्य सूत्रधार रहीं।
स्कूली बच्चे: अपनी प्रतिभा से कार्यक्रम में प्राण फूंके।
सहयोग: स्थानीय व्यापारियों, पत्रकारों और अधिकारी-कर्मचारियों के सक्रिय सहयोग से यह कार्यक्रम भव्य रूप से संपन्न हुआ।
भाईचारे का संदेश
अंत में वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सद्भाव की एक मिसाल है, जहाँ पूरा नगर एक परिवार की तरह एकजुट होकर राष्ट्रीय पर्व मनाता है।
