तिमेड: में सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने पर ‘स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन; सनातन परंपराओं की रक्षा का लिया संकल्प

तिमेड भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण कालखंड और हमारी सांस्कृतिक जिजीविषा को स्मरण करने के लिए शनिवार को तिमेड स्थित प्राचीन शिव मंदिर में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जनवरी 1026 में गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए बर्बर आक्रमण और मंदिर ध्वंस की 1000वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था।
1000 वर्ष पूर्व का वह काला अध्याय और भारत का पुनरुत्थान
वर्ष 2026 में उस ऐतिहासिक घटना को पूरे एक हजार साल बीत चुके हैं, जब विदेशी आक्रांता महमूद गजनी ने भारतीय आस्था के केंद्र सोमनाथ को क्षति पहुँचाई थी। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने रेखांकित किया कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, अटूट विश्वास और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। बार-बार तोड़े जाने के बाद भी हर बार सोमनाथ का उठ खड़ा होना इस बात का प्रमाण है कि भारत की आत्मा अजेय है।
सामूहिक जप और महाआरती से गुंजायमान हुआ वातावरण
इस ऐतिहासिक अवसर पर मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने भक्ति भाव के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम की मुख्य झलकियां निम्नलिखित रहीं:
ॐ नमः शिवाय का जाप: राष्ट्र और सनातन संस्कृति की रक्षा के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं ने 1008 बार सामूहिक मंत्रोच्चार किया।
सांस्कृतिक विमर्श: वक्ताओं ने सोमनाथ के 1000 वर्षों के संघर्ष, सहनशीलता और पुनरुत्थान की गाथा साझा की।
महाआरती: कार्यक्रम का समापन भगवान शिव की भव्य आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
“सोमनाथ का इतिहास हमें सिखाता है कि समय कितना भी कठिन क्यों न हो, सत्य और आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता। आज का यह आयोजन हमारी भावी पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का एक माध्यम है।” — स्थानीय वक्ता
प्रमुख जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
इस स्वाभिमान पर्व में क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
टी. गोवर्धन (पूर्व जनपद उपाध्यक्ष)
लक्ष्मी वासम(सरपंच)
सदाशिव राजेंद्र
इनके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के अनेक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी उपस्थित जनों ने एक स्वर में राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
तिमेड में आयोजित इस पर्व ने न केवल इतिहास के पन्नों को पलटने का काम किया, बल्कि स्थानीय निवासियों में धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव की एक नई ऊर्जा का संचार किया। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि भारत अपनी विरासत की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है। इस अवसर पर टी गोवर्धन द्वारा शिव मंदिर में शाम 7:00 बजे रामायण पाठ का आयोजन रखा गया है

