जहाँ कभी गोलियों की गूंज थी, अब वहाँ गूंज रही है सैलानियों की हँसी – बीजापुर का नंबी जलप्रपात बना शांति और सौंदर्य का प्रतीक

बीजापुर।
बस्तर की धरती ने वो दौर भी देखा है जब जंगलों में गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों की आवाज़ गूंजा करती थी। डर और सन्नाटे की पहचान बने इन इलाकों में अब एक नई तस्वीर उभर रही है। बीजापुर का नंबी जलप्रपात, जो प्रदेश का सबसे ऊँचा जलप्रपात है, अब शांति, सौंदर्य और नई उम्मीदों का प्रतीक बन चुका है।




घने जंगलों के बीच ऊँचाई से गिरता पानी जब धुंध की चादर ओढ़कर नीचे आता है, तो दृश्य किसी फिल्मी परिदृश्य से कम नहीं लगता। कभी नक्सली घटनाओं के कारण यहाँ पहुँच पाना मुश्किल था, लेकिन अब यह जगह सैलानियों के कदमों से गुलजार हो रही है। पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हुए न केवल जलप्रपात की भव्यता को निहार रहे हैं, बल्कि इलाके की बदलती तस्वीर के भी गवाह बन रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी यह बदलाव किसी वरदान से कम नहीं। पर्यटन से जुड़कर उन्हें रोज़गार, पहचान और विकास के नए रास्ते मिल रहे हैं। गांव की महिलाएँ और युवा अब पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और मार्गदर्शन सेवाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
प्रशासन और सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों ने इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाया है। जिस रास्ते पर कभी डर की छाया थी, अब वहाँ रंगीन झंडियाँ और स्वागत बोर्ड लगे हैं। यह नज़ारा बस्तर के बदलते स्वरूप और लौटती शांति की गवाही दे रहा है।
👉 नंबी जलप्रपात आज सिर्फ पानी का झरना नहीं, बल्कि बदलते बीजापुर की जीवंत पहचान बन चुका है – जहाँ कभी गोलियों की गूंज थी, अब वहीं गूंज रही है सैलानियों की हँसी और कैमरों की क्लिक।

