बीजापुर

नानगुर में मिशनरी सभा पर संकट: धर्मांतरण की आशंका पर विहिप, बजरंग दल और सर्व आदिवासी समाज ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

​जगदलपुर, 29 अक्टूबर 2025। बस्तर जिले के नानगुर क्षेत्र में 1 से 3 नवंबर तक प्रस्तावित ईसाई मिशनरियों की बाइबल प्रचार प्रसार सभा पर रोक लगाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल और सर्व आदिवासी समाज ने आज एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। तीनों संगठनों ने संयुक्त रूप से जगदलपुर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर इस आयोजन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग की है। संगठनों ने स्पष्ट आशंका जताई है कि इस धार्मिक सभा का मुख्य उद्देश्य धर्मांतरण है, जो क्षेत्र की सामाजिक शांति और पारंपरिक एकता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।
​ पेसा कानून का उल्लंघन और ग्रामसभा की अनदेखी
​ज्ञापन में संगठनों ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि नानगुर क्षेत्र Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act (PESA) यानी पेसा कानून के अंतर्गत आता है। इस कानून के तहत, किसी भी बाहरी धार्मिक या प्रचारात्मक आयोजन के लिए ग्रामसभा की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
​ संगठनों का तर्क:
“नानगुर क्षेत्र में पेसा कानून लागू है, और बिना ग्रामसभा की अनुमति के ऐसा कोई भी बाहरी धार्मिक आयोजन कानूनन प्रतिबंधित है। मिशनरियों द्वारा आयोजित यह सभा न केवल पेसा कानून का सीधा उल्लंघन है, बल्कि यह ग्रामसभा के निर्णय की भी अवहेलना है।”
​संगठनों ने यह भी बताया कि क्षेत्र की ग्रामसभा ने पहले भी देवी-देवताओं की आस्था और स्थानीय परंपराओं की रक्षा हेतु ऐसे आयोजनों का कड़ा विरोध किया था। इसके बावजूद, मिशनरी समूह 1 से 3 नवंबर तक प्रचार सभा आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे विरोध और तेज हो गया है।
​ धर्मांतरण की आशंका: सामाजिक सौहार्द को खतरा
​ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि प्रस्तावित सभा के पीछे धर्मांतरण का छिपा हुआ उद्देश्य है। विहिप, बजरंग दल और सर्व आदिवासी समाज का मानना है कि मिशनरियों के इस प्रकार के बड़े आयोजन से बस्तर जैसे संवेदनशील आदिवासी बहुल क्षेत्र की धार्मिक एकता, परंपरागत संस्कृति और सामाजिक सौहार्द को गंभीर क्षति पहुँच सकती है।
​संगठनों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि:
​इस सभा पर अविलम्ब रोक लगाई जाए।
​क्षेत्र में शांति एवं पारंपरिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी की जाए।
​यह विरोध प्रदर्शन बस्तर में धर्मांतरण की आशंका को लेकर बढ़ते स्थानीय असंतोष और आदिवासी संस्कृति की रक्षा की चिंताओं को उजागर करता है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह पेसा कानून के प्रावधानों और संगठनों की गंभीर चिंताओं को देखते हुए क्या निर्णय लेता है।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

Back to top button

Discover more from ख़बर छत्तीसगढ़

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading