बीजापुर

भोपालपटनम में शिक्षा का उत्सव: एफएलएन मेले ने बच्चों की प्रतिभा को दिया नया आयाम

भोपालपटनम ब्लॉक की शालाओं में शिक्षा का एक अनूठा उत्सव देखने को मिला, जहाँ ‘एफएलएन मेला’ (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) के तहत युवा मस्तिष्कों को शिक्षा के रंग-बिरंगे स्वरूप से जोड़ा गया। ब्लॉक के सभी 158 स्कूलों में आयोजित इस विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम ने कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस मेलेकी सबसे बड़ी विशेषता रही पारंपरिक शिक्षण पद्धति से हटकर नवाचारी शिक्षण विधियों का प्रयोग। बच्चों ने विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से ज्ञान अर्जित किया, जिनमें शामिल हैं: खेल-खेल में सीखने की रोचक विधियाँ, गतिविधि-आधारित व्यावहारिक शिक्षण, स्वयं सीखने को प्रोत्साहित करने वाली पद्धतियाँ,आकर्षक टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) का प्रयोग, इंटरएक्टिव लर्निंग एक्टिविटीज

मेले में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। प्रत्येक कक्षा में बच्चे उत्साहपूर्वक विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते नजर आए। शिक्षकों ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में न केवल पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत होती है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

यह कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवंप्रशिक्षण परिषद (SCERT) रायपुर और राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा रायपुर के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम को जिला प्रशासन का पूर्ण समर्थन मिला, जिसमें कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक बीजापुर के मार्गदर्शन और जिला शिक्षा अधिकारी बीजापुर के नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार कोरम, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी श्री श्रीनिवास एटला एवं बीआरसी श्री शंकर यालम ने विभिन्न शालाओं का दौरा कर एफएलएन मेले का अवलोकन किया। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से रुबरू बातचीत कर उनके प्रयासों की सराहना की और भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया।

यह एफएलएन मेला कार्यक्रम न केवल बच्चों के शैक्षिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि इसने शिक्षण के नए मानदंड स्थापित किए हैं। इस पहल से बच्चों में सीखने की ललक तो जागृत हुई ही है, साथ ही शिक्षकों को भी शिक्षण की नवीन विधियों को अपनाने की प्रेरणा मिली है। भोपालपटनम ब्लॉक का यह प्रयास वास्तव में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय कदम साबित हो रहा है।

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