बीजापुर में सहकारी समिति कर्मचारियों ने खोला मोर्चा: धान खरीदी बहिष्कार की चेतावनी, डिप्टी कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

प्रदेश की सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ 6685 के बैनर तले एकजुट हुए इन कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो वे चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेंगे और दिनांक 03/11/2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाकर धान खरीदी का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
कर्मचारियों ने अपनी मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को सौंपा है। महासंघ का कहना है कि सरकार की उपेक्षा के कारण कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों की प्रमुख 4 सूत्रीय मांगें निम्नलिखित हैं:
1. धान खरीदी से संबंधित लंबित भुगतान और व्यवस्था सुधार:
धान खरीदी वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 का संपूर्ण धान सुखत (सुखाने के कारण होने वाली कमी) की राशि समितियों को तुरंत प्रदान की जाए।
परिवहन में होने वाले विलंब को रोकने के लिए हर सप्ताह संपूर्ण धान का परिवहन सुनिश्चित किया जाए।
कमीशन, शून्य सार्टेज प्रोत्साहन राशि का अविलंब भुगतान किया जाए।
समितियों के लिए सुरक्षा एवं भंडारण व्यय की राशि को बढ़ाया जाए।
2. आउटसोर्सिंग पर रोक और नियमितीकरण:
आउटसोर्सिंग के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पूर्व से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को विभाग तय करते हुए नियमित किया जाए।
3. प्रबंधकीय अनुदान की मांग:
प्रत्येक समितियों को मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज पर 3-3 लाख रुपये का प्रबंधकीय अनुदान प्रदान किया जाए।
4. नवीन भर्ती पर रोक और पदोन्नति से नियुक्ति:
समितियों में नवीन भर्ती पर तत्काल रोक लगाई जाए।
समितियों के रिक्त पदों पर पदोन्नति के माध्यम से ही कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
कर्मचारी महासंघ ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन उनकी वर्षों पुरानी लंबित मांगों का परिणाम है, जिस पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। यदि निर्धारित तिथि तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रदेश में धान खरीदी का कार्य पूरी तरह से ठप हो सकता है, जिसका सीधा असर किसानों और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। कर्मचारी नेताओं ने सरकार से अपील की है कि धान खरीदी जैसे महत्वपूर्ण कार्य को देखते हुए उनकी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।


