बुलाई लक्ष्मी पूजा: गोल्लागुड़ा में मरार समाज की 70 वर्षों की अटूट परंपरा, संतान और सुख-समृद्धि की कामना

गोल्लागुड़ा गांव में मरार समाज द्वारा बुलाई लक्ष्मी मूर्ति की स्थापना कर 70 वर्षों से चली आ रही एक अनूठी और गहरी आस्था वाली धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। यह दो दिवसीय भव्य पूजा संतान सुख और गांव की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाई जाती है, जिसमें समाज की महिलाएं बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं।
संतान प्राप्ति की विशेष मान्यता:
मरार समाज के अध्यक्ष श्री अजय गुरला ने इस परंपरा के महत्व को बताते हुए कहा कि यह पूजा उनके बड़े-बुजुर्गों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी की जा रही है। इस पूजा के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा है और यह मान्यता है कि सच्चे मन से श्रद्धापूर्वक पूजा करने पर जिन महिलाओं को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। इसके साथ ही, यह कार्यक्रम पूरे गांव में सुख और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
भव्य आयोजन और विसर्जन:
बुलाई लक्ष्मी पूजा का यह कार्यक्रम दो दिनों तक चलता है। पूजा के दौरान गांव में उत्सव का माहौल रहता है, जिसमें कई गांवों के लोग शामिल होते हैं और देवी लक्ष्मी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर पारंपरिक नाच-गाने का भी आयोजन किया जाता है, जो माहौल को और भी भक्तिमय और आनंदमय बना देता है।
कार्यक्रम के अंतिम दिन, विधि-विधान से पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है। इसके उपरांत, स्थापित की गई बुलाई लक्ष्मी माता की मूर्ति का बाजे-गाजे के साथ शोभायात्रा निकालते हुए इंद्रावती नदी में विसर्जन किया जाता है।
श्री गुरला ने बताया कि यह परंपरा कई सदियों से चली आ रही है, जो मरार समाज की अटूट आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। यह पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के लोगों को एक सूत्र में पिरोने वाला एक महा-उत्सव है।



