बीजापुर जिले में मरार समाज ने धूमधाम से मनाया ‘बुलाई माता लक्ष्मी’ पर्व, तीन दिवसीय आयोजन में उमड़ा जनसैलाब

बीजापुर जिले में मरार समाज के द्वारा प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी दिवाली के पावन अवसर पर अपनी अनूठी परंपरा का निर्वहन करते हुए, ‘बुलाई माता लक्ष्मी जी’ की स्थापना, पूजा-अर्चना और पारंपरिक नृत्य के साथ भव्य आयोजन किया गया। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम मरार समाज की सदियों पुरानी आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जिसका आनंद उठाने के लिए छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र और तेलंगाना राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं एकत्रित हुए।
तीन दिवसीय उत्सव की परंपरा:
मरार समाज का यह धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे तीन दिनों तक चलता है, जिसकी अपनी एक विशिष्ट अनुष्ठानिक प्रक्रिया है:
प्रथम दिवस (स्थापना): कार्यक्रम की शुरुआत पहले दिन ‘बुलाई माता लक्ष्मी जी’ की पारंपरिक रूप से स्थापना के साथ हुई।
द्वितीय दिवस (पूजा-अर्चना, नृत्य और विसर्जन): दूसरे दिन रात भर माता लक्ष्मी जी की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान रात भर पारंपरिक लोक नृत्यों का आयोजन हुआ, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय और उल्लास से भर दिया। रात्रि के अंत में माता का विसर्जन किया गया।
तृतीय दिवस (आसान निकाला): उत्सव के तीसरे दिन ‘गड्ढा’ माता लक्ष्मी जी का आसान निकालने की परंपरा निभाई गई, जो इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अन्तर्राज्यीय भागीदारी और सामाजिक एकजुटता:
इस उत्सव में पूरे क्षेत्रवासी, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना राज्यों से आए युवा, बड़े बुजुर्ग और महिलाओं ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर समाज में एकजुटता और भाईचारे का संदेश दिया।
इन क्षेत्रों में मनाया जाता है यह पर्व:
मरार समाज के द्वारा यह कार्यक्रम बीजापुर जिले के गोल्लागुडा, बारेगुड़ा, वरदल्ली, बीजापुर शहर, मद्देड़ सहित कई अन्य क्षेत्रों में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
यह कार्यक्रम मरार समाज की सांस्कृतिक विरासत और अटूट धार्मिक आस्था को प्रदर्शित करता है, जिसका सभी वर्ग के लोगों ने वर्ष में एक बार, दिवाली के मौके पर, पूरा आनंद लिया।

