



बरसात और कठिन हालात के
बावजूद स्वास्थ्य टीम का जज़्बा
चिंतावगु नदी पार कर गोरगोंडा पहुँची, मलेरिया मुक्त अभियान को दी गति
भोपलपटनम।
बरसात का मौसम और सामने तेज बहती चिंतावगु नदी—ऐसे हालात में गाँव तक पहुँचना किसी चुनौती से कम नहीं। लेकिन ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहने देने का संकल्प लिए गोरला स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. के. चलपति राव के नेतृत्व में 2 सितंबर को नदी पार कर गोरगोंडा गाँव तक पहुँचना सुनिश्चित किया।
गाँव पहुँचते ही टीम ने सबसे पहले ग्रामीणों की मलेरिया किट से जाँच की। कई ग्रामीणों में सर्दी, खांसी और बुखार जैसे लक्षण मिले, मगर राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति में मलेरिया पॉजिटिव नहीं पाया गया। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि समय पर जाँच और रोकथाम ही बीमारी को फैलने से रोकने का सबसे कारगर तरीका है।
इसके साथ ही टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। गर्भवती महिलाओं को आवश्यक टीके लगाए गए, वहीं बच्चों को आयरन-फोलिक एसिड सीरप और विटामिन ‘ए’ की खुराक दी गई। टीम ने बताया कि यह कदम बच्चों को कुपोषण और एनीमिया से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉ. चलपति राव ने कहा—
“कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद हमारी प्राथमिकता हर हाल में ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना है। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान तभी सफल होगा, जब गाँव-गाँव तक समय पर जाँच और उपचार पहुँच सके। यही हमारी टीम की असली ताकत है।”
टीम ने ग्रामीणों को बरसात के मौसम में सफाई रखने, घरों और आँगनों में पानी जमा न होने देने और मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने की सलाह दी। साथ ही, बीमारी के लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील भी की गई।
इस साहसिक अभियान में स्वास्थ्यकर्मी माधवी पनवलकर, गणपत गुरला, मधु मालती डेविड, महेन्द्र लम्बाड़ी, शैलेश कुमार, संजीव मट्टी, ब्रिजेश कोरम और नागुबाई वासम शामिल रहे।
गोरगोंडा तक पहुँची यह टीम न केवल ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ लेकर आई, बल्कि मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ के सपने को भी मजबूती प्रदान कर गई।


