भोपालपटनम: भक्ति और आस्था के संगम में डूबा क्लब प्रांगण, श्रद्धा भाव से संपन्न हुई भगवान स्वामी अय्यप्पा की ‘मेटला पूजा’

भोपालपटनम
छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर स्थित तहसील मुख्यालय भोपालपटनम में आज दक्षिण भारतीय संस्कृति और अटूट आध्यात्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। स्थानीय क्लब प्रांगण में भगवान स्वामी अय्यप्पा की भव्य ‘मेटला पूजा’ (पड़ी पूजा) का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र और तेलंगाना से आए हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
तीन राज्यों की संस्कृतियों का अनूठा मिलन
भोपालपटनम की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है। महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमाओं से सटे होने के कारण यहाँ न केवल व्यापारिक और पारिवारिक संबंध (रोटी-बेटी का रिश्ता) प्रगाढ़ हैं, बल्कि सांस्कृतिक मेलजोल भी गहरा है। यही कारण है कि केरल के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ शबरीमाला से जुड़ी यह कठिन साधना यहाँ के जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
41 दिनों की कठिन साधना और वैज्ञानिक महत्व
स्वामी अय्यप्पा की दीक्षा लेने वाले भक्तों के लिए यह उत्सव उनकी 41 दिनों की कठिन तपस्या का चरम बिंदु है। गुरु स्वामियों के मार्गदर्शन में भक्त कार्तिक मास की ठंड में ‘मंडलम व्रत’ का पालन करते हैं।
कठोर नियम: तुलसी या रुद्राक्ष की माला धारण कर भक्त पूर्ण ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार और नंगे पैर चलने जैसे कड़े संकल्पों को निभाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त साधना: प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे ठंडे जल से स्नान कर विभूति और चंदन का लेप लगाया जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: जानकारों के अनुसार, शीतल स्नान शरीर की अतिरिक्त ऊष्मा को नियंत्रित करता है और भूमि पर शयन करने से शरीर का अस्थि तंत्र (Skeletal System) संतुलित और मजबूत होता है।
भव्य मेटला पूजा और इरुमुडी का विधान
पूजा स्थल (क्लब प्रांगण) को फूलों और बिजली की लड़ियों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। मुख्य आकर्षण ‘मेटला पूजा’ रही, जहाँ भगवान अय्यप्पा के 18 पवित्र सोपानों (सीढ़ियों) का प्रतीक स्वरूप पूजन किया गया।
श्रद्धालुओं ने अपने सिर पर ‘इरुमुडी’ (दो हिस्सों वाली पोटली) रखकर पूजा की। मान्यता है कि शबरीमाला में सोने की 18 सीढ़ियां चढ़ने से पूर्व यह साधना अनिवार्य है। इस अवसर पर भगवान को प्रिय ‘अरुअन्नम’ प्रसाद का वितरण भी किया गया।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस पावन अवसर पर भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन करने कई राजनीतिक एवं सामाजिक हस्तियाँ पहुँचीं। भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय नेता महेश गागड़ा ने पूजा में शामिल होकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
उनके साथ भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री जी. वेंकट, पूर्व जिलाध्यक्ष श्रीनिवास मुदलियार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पेरे पुलैया, जिलापंचायत सदस्या कविता कोरम, जनपद पंचायत अध्यक्ष सरिता कूड़ेम्म,टी. गोवर्धन, नरसिंह रेड्डी, गिरिजा शंकर तामड़ी, वेंकट यालम, सचिन अतरम, के. श्रीनिवास, अखिलेश गुरला और साईं चट्टी सहित कई अन्य वरिष्ठ जन उपस्थित रहे।
व्यापारी संघ के अध्यक्ष जी प्रेम कुमार व्यापारी मुरली चांडक जी मुरलीधर उमा महेश पड़ी पूजा में उपस्थित थे
आयोजन समिति का योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में अय्यप्पा सेवा समिति भोपालपटनम के सदस्यों और गुरु स्वामियों का विशेष योगदान रहा। गुरु स्वामी लोकनाथ रापर्ती, समैया मिच्चानेनी, बैथमचेरला आदिनारायण, प्रशांत पल्ले, धनंजय गोलीवार, राहुल आनकारी, पौनूरी प्रशांत, प्रतीक रंगूवार और ओम मरकाम सहित अन्य स्वामियों ने व्यवस्थाओं की कमान संभाली।
मकर ज्योति का इंतजार
आयोजन के अंत में विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया। अब भक्तों की निगाहें आगामी मकर संक्रांति पर टिकी हैं, जब शबरीमाला के कांतमालय पर्वत पर ‘मकर ज्योति’ के दर्शन होंगे। भोपालपटनम से भक्तों का जत्था इस दिव्य दर्शन के लिए जल्द ही रवाना होगा।
